Karam ek Seekh
Story

Hindi Story कर्म एक सीख

कर्म एक सीख

एक भिखारी रोज एक दरवाजें पर जाता और भीख के लिए आवाज़ लगाता,,, और जब घर का मालिक बाहर आता
तो उसे गंदी-गंदी गलियां और ताने देता- मर जाओ, काम क्यों नहीं करतें, जीवन भर भीख मांगतें रहोगे,
कभी-कभी गुस्सें में उसे धकेल भी देता,,, पर भिखारी बस इतना ही कहता, ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें,
एक दिन सेठ बड़े गुस्से में था,, शायद व्यापार में घाटा हुआ था, वो भिखारी उसी वक्त भीख मांगने आ गया,
सेठ ने आओ देखा ना ताओ, सीधा उसे पत्थर दे मारा,,, भिखारी के सर से खून बहने लगा।
फिर भी उसने सेठ से कहा – “ईश्वर तुम्हारें पापों को क्षमा करें,” और वहां से जाने लगा, सेठ का थोड़ा
गुस्सा कम हुआ, तो वह सोचने लगा मैंने उसे पत्थर से भी मारा पर उसने बस दुआ दी,,, इसके पीछे
क्या रहस्य है..?? जानना पड़ेगा, और वह भिखारी के पीछे चलने।
भिखारी जहाँ भी जाता सेठ उसके पीछे जाता,,, कहीं कोई उस भिखारी को कोई भीख दे देता तो कोई उसे मारता,
कोई ज़लील करता गालियाँ देता,,, पर भिखारी इतना ही कहता- “ईश्वर तुम्हारे पापों को क्षमा करें।”
अब अंधेरा हो चला था, भिखारी अपने घर लौट रहा था, सेठ भी उसके पीछे था, भिखारी जैसे ही अपने घर लौटा,
एक टूटी फूटी खाट पे, एक बुढ़िया सोई थी,,, जो भिखारी की पत्नी थी, जैसे ही उसने अपने पति को देखा उठ
खड़ी हुई और भीख का कटोरा देखने लगी। उस भीख के कटोरे में मात्र एक आधी बासी रोटी थी, उसे देखते
ही बुढ़िया बोली बस इतना ही और कुछ नहीं, और ये आपका सर कहाँ फूट गया?
Karam ek Seekh
भिखारी बोला – हाँ बस इतना ही किसी ने कुछ नहीं दिया,,, सबने गालिया दी, पत्थर मारें, इसलिए ये सर फूट गया।
भिखारी ने फिर कहा – सब अपने ही पापों का परिणाम हैं, याद है ना तुम्हें, कुछ वर्षों पहले हम कितने रईस हुआ
करते थे, क्या नहीं  था हमारे पास, पर हमने कभी दान नहीं किया।
याद है तुम्हें – वो अंधा भिखारी, बुढ़िया  की आँखों में आंसू आ गये और उसने कहा –
हाँ, कैसे हम उस अंधे भिखारी का मज़ाक  उडाते थे,, कैसे उसे रोटियों की जगह खाली कागज रख देते थे,,
कैसे हम उसे ज़लील करते थे,, कैसे हम उसे कभी-कभी मार वा धकेल देते थे,,
अब बुढिया ने कहा हाँ सब याद है मुझे – कैसे मैंने भी उसे राह नहीं दिखाई और घर के बनें नालें में गिरा दिया था,
जब भी वह रोटिया मांगता मैंने बस उसे गालियाँ दी, एक बार तो उसका कटोरा तक फेंक दिया,,,
और वो अंधा भिखारी हमेशा कहता था – तुम्हारे पापों का हिसाब ईश्वर करेंगे, मैं नहीं,
आज उस भिखारी की बददुआऔर हाय हमें ले डूबी, फिर भिखारी ने कहा, पर मैं किसी को
बददुआ नहीं देता,,,
चाहे मेरे साथ कितनी भी जात्ती क्यों ना हो जाए। मेरे लब पर हमेशा दुआ रहती हैं, मैं अब नहीं चाहता, कि कोई
और इतने बुरे दिन देखे। मेरे साथ अन्याय करने वालों को भी मैं दुआ देता हूँ,, क्योंकि उनको मालूम ही नहीं,
वो क्या पाप कर रहें है, जो सीधा ईश्वर देख रहा हैं। जैसी हमने भुगती है, कोई और ना भुगते, इसलिए मेरे दिल
से बस अपना हाल देख दुआ ही निकलती हैं।
सेठ चुपके-चुपके सब सुन रहा था, उसे अब सारी बात समझ आ गयी थी, बूढ़े-बुढ़िया ने आधी रोटी को दोनों ने
मिलकर खाया, और प्रभु की महिमा है,, बोल कर सो गए।
अगले दिन, वह भिखारी भीख मांगने सेठ के यहाँ गया,,, सेठ ने पहले से ही रोटिया निकाल के रखी थी।
उसने भिखारी को दी और हल्की से मुस्कान भरे स्वर में कहा – माफ करना बाबा, गलती हो गयी, भिखारी ने कहा –
ईश्वर तुम्हारा भला करे, और वो वहाँ से चला गया।
सेठ को एक बात समझ आ गयी थी, इंसान तो बस दुआ-बददुआ देते है,,, पर पूरी वो ईश्वर जादूगर कर्मों के हिसाब से करता हैं।
“हो सके तो बस अच्छा करें, वो दिखता नहीं है तो क्या हुआ ?? सब का हिसाब पक्का रहता है उसके पास”

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *