पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच
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पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच Nature and Environment

पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच

दोस्तों हम आपके साथ एक ऐसी बात शेयर करने जा रहे है, जिसे सुन कर शायद आपको बुरा लगे। लेकिन, सच कड़वा ही
होता है, और उसे सुन कर बुरा भी लगता है। हमारे पास समय बहुत कम है, अगर हमने इस बात की अहमियत नहीं
समझी तो शायद इस पृथ्वी पर जीवन ख़त्म हो जायेगा।

क्या आपने कभी सोचा ?

आपने और हमने कभी सोचा है? हम अपनी आने वाली पीढ़ी को विरासत में क्या दे कर जायेंगे? नहीं, किसी ने नहीं सोचा,
क्योंकि हमारे पास फुर्सत नहीं है कि हम आने वाले संकट के बारे में सोचे और उस विनाश को रोकने की कोशिश करें।

दोस्तों, क्या आप चाहते हो कि आने वाली पीढ़ी को पीने के लिए पानी न मिलें, पानी मिलें तो बाढ़ के रूप में मिलें,
सैलाब के रूप में मिलें। सांस लेने के लिए ऑक्सीजन न मिलें, अगर मिलें तो दूषित मिलें। कभी वो भूकंप देखें,
तो कभी तूफ़ान, ऐसा ही होगा अगर अभी भी हम नहीं सम्भले।

पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच

आपने सोचा ऐसा क्यों होगा? ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि हमने सब ख़त्म कर दिया। यही धरती पहले हरी-भरी थी, बहुत सारे
पेड़, घने जंगल और पहाड़ हुआ करते थे, चारों तरफ़ हरियाली थी। अनेक प्रकार के जीव-जंतु थे और जानवर हुआ करते थे,
जिन्होनें प्रकृति की सुंदरता को चार चाँद लगा रखे थे।

इंसान ने क्या किया प्रकृति के साथ ?

हमसे पहले की पीढ़ियों ने ये सब देखा, लेकिन अब लोगों ने प्रकृति से खिलवाड़ करना शुरू कर दिया। देखते-देखते इंसान ने
जीव-जंतु और जानवरों से उनका घर छीन लिया, लबालब पेड़ों से भरे जंगल उजाड़ दिए। अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल
किया और पेड़ों को काटना शुरू कर दिया।

इसका परिणाम ये हुआ कि धीरे-धीरे बहुत सारे जीव-जंतु लुप्त हो गए, और जो जानवर बचे है वो केवल गिनती के रह गए है।
हो सकता है, आने वाले समय में वो भी समाप्त हो जाये, और वो इतिहास बन कर केवल किताबों के चित्रों में रह जायेंगे।

दोस्तों, इंसान जंगलों को निगल गया, जानवरों को निगल गया, पहाड़ों की कटाई करके नए नए रास्ते बना लिए, पेड़-पौधों
को ख़त्म कर दिया। अपनी छोटी-छोटी ज़रूरतें पूरी करने के लिए धीरे-धीरे प्रकृति का सर्वनाश कर दिया।

पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच

धरती पर सांसे तभी तक सुरक्षित है जब तक ये पर्यावरण सुरक्षित है-

पहले प्रकृति को हम खा गए, और प्रकृति अब हमें खा रही है। जिसके दुष्परिणाम हमारे सामने आ रहे है, कहीं बाढ़,
कहीं तूफ़ान, कहीं भूकंप, तो कहीं ज्वालामुखी और पता नहीं क्या क्या हो रहा है? और ऐसे ही चलता रहा तो,
धरती का नाश हो जायेगा। जब प्रकृति और पर्यावरण ही नहीं होगा तो इंसान कहाँ होगा?

आज इंसान अपने आपको बहुत ताकतवर समझता है, पर उसे शायद ये नहीं पता कि उसकी यही ताकत उसे विनाश की
ओर ले जा रही है।

इंसान से प्रकृति परेशान

अब मानसून बाढ़ लाता है, गर्मियां तूफ़ान लाती है, और सर्दियाँ प्रदूषित कोहरा जिसमें इंसान सांस भी नहीं ले पाता। ये सब
पेड़ों की कमी के कारण हो रहा है। अगर अब भी हमनें प्रकृति को नष्ट करना बंद नहीं किया तो, सब ख़त्म हो जायेगा।

Paryavaran or prakrti

आपने केदारनाथ का विनाश तो अपनी आँखों से देखा होगा, और हर रोज़ धरती पर कहीं न कहीं ऐसा होता ही है। लैंड स्लाइड
की मात्रा बढ़ चुकी है, पहाड़ों की बर्फ तेज़ी से पिघल रही है, सूरज आग बरसा कर धरती का तापमान बढ़ाता जा रहा है।

विनाश को कैसे रोका जा सकता है ?

दोस्तों, इस विनाश से अभी भी बचा जा सकता है। अगर हम पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें बचाना शुरू कर दे। हम बहुत सारे फ़िज़ूल खर्चे करके पैसे बर्बाद करते है, जो गलत होते है, जैसे शराब पीना, सिगरेट पीना, गुटखा खाना। क्या, हम उन पैसों को बचा कर पौधे नहीं लगा सकते?

पर्यावरण और प्रकृति से जुड़े कड़वे सच

अगर हम एक साल में पांच पौधे भी लगाए तो भी हम अपनी धरती को बचाने और इसकी सुंदरता लौटने की कोशिश कर सकते है। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना है, इस पर्यावरण को फिर जीने योग्य बनाना है। तो क्या आप हमारी इस कोशिश में हमारा साथ देंगे?

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