Moortikar
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मूर्तिकार का अहंकार – मनुष्य की सबसे बड़ी बुराई है अहंकार

मूर्तिकार का अहंकार

एक गाँव में एक विदुर नाम का मूर्तिकार (मूर्ति बनाने वाला ) रहता था| वह ऐसी मूर्तियाँ बनता था, जिन्हें देख कर हर किसी को मूर्तियों के जीवित होने का एहसास होता था| अपनी इस कला के कारण आस -पास के सभी गाँव में और विदेशों में भी वह बहुत प्रसिद्द था| उसकी इस अद्भूत कलाकारी के लिए उसे कई ईनाम भी मिले थे| लेकिन जैसे-जैसे उसे नाम और शौहरत मिलने लगे, वह घमंडी होता गया|

Moortikar ka ahankar

एक दिन उसके यहाँ सूर्यसेन महाराज की ओर से  शक्ति बाबा आये, महाराज की आज्ञा के अनुसार उसे  शक्ति बाबा की मूर्ति बनानी थी| शक्ति बाबा हाथ की रेखाएं देख के भविष्य बता सकते थे| मूर्तिकार ने शक्ति बाबा से कहा  – आप मेरा भी भविष्य बताइये, लेकिन दुनिया में पहचान, बहुत सारा पैसा, इज़्ज़त, शौहरत ये सब छोड़कर अगर आपको कुछ और दिखता है तो बताइये| शक्ति बाबा को ये बात जल्दी ही समझ आ गयी कि विदुर को अपने ऊपर काफी घमंड है| वो बोले – विदुर एक बात का ध्यान रखना कि जीवन में कभी “अहंकार” मत करना|

विदुर बोला बाबा मेरा भविष्य ??

तो बाबा ने विदुर का हाथ देखा और कहा – अब तुम्हारे पास से सिर्फ 40 दिन की ज़िंदगी बची है| 40 वें दिन की मध्यरात्रि में तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी|
शक्ति बाबा की भविष्यवाणी सुन कर विदुर को धक्का पहुंचा, मरने के डर से वो काफी चिंतित हुआ, अपनी मौत कैसे टाले ये वो सोचने लगा|

उसने अपनी कला के बल पर यमराज को फ़साने की योजना बनाई, उसने अपने जैसे दिखने वाली 6 मूर्तियां तैयार की| ये मूर्तियां उसने अपने जैसे ऐसी हूबहू बनाई कि अगर उनमें से उसे कोई ढूंढना चाहे तो भी नहीं ढूंढ सकता था| इसी कारण वो और भी घमंडी हो गया, और कहता है कि अब तो यमराज भी मुझे नहीं ढूंढ सकता, मेरी कला के आगे मौत को भी हार माननी पड़ेगी|

Moortikar ka ahankar

आखिरकार मूर्तिकार के मरने की रात आ गयी..

और वह हुबहू अपने जैसी बनाई मूर्तियों के बीच जाकर लेट गया| थोड़ी ही देर में यमराज वहां प्रकट हो गए, और एक साथ सात एक जैसी मूर्तियां देख कर चकरा गए “अरे बाप रे” और सोच में पड़ गए कि इनमें मूर्तिकार को कैसे पहचानूँ? ये तो बड़ा सवाल है|

अचानक यमराज को हल मिल गया, और वो बोले –
वाह, मूर्तिकार बहुत सुन्दर, तुमने तो तुम्हारी जैसी मूर्तियां बनाकर मुझे फ़साने की बहुत अच्छी योजना बनाई है| मगर, तुम जैसे महान कलाकार से
ये गलती कैसे हो सकती है? मुझे तो विश्वास नहीं होता|

Moortikar ka ahankar

यमराज के इतना कहने पर मूर्तिकार झट से खड़ा हो गया, और बोला –
“गलती” और मुझसे ? नहीं, ये नहीं हो सकता|

यमराज बोले – बस यही है तुम्हारी गलती| मैंने मूर्ति में गलती निकाली ये कहने पर तुम्हारा “अहंकार” जाग उठा| ये “अहंकार” ही तुम्हारी सबसे बड़ी गलती है| जो तुम पर भारी पड़ी, अगर तुम ये गलती नहीं करते तो मैं इन मूर्तियों में से तुम्हें कभी नहीं ढूंढ पाता| और यमराज उसे अपने साथ ले जाते है|

तो दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि “अहंकार” हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, “अहंकार”  ने हमेशा इन्सान को परेशानी और दुःख के सिवा कुछ नहीं दिया|

दोस्तों आप इस कहानी को हमारे Youtube Channel “Lovely Sovely” पर भी देख सकते है

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