श्री पित्तर जी की आरती
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श्री पित्तर जी की आरती

श्री पित्तर जी की आरती

तरज : नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे…

टेक : पित्तर देवा – पित्तर देवाश्री पित्तर जी की आरती
जय हो पित्तर देवा ।
युगों युगों से शरण आपकी,
करते हैं हम सेवा ।।
पंचवस्त्र, जल, दूध संग में
खीर अक्षत वाली ।
करी खता की माफ़ी दे दो,
करके दया निराली ।।
विनती है जी राजी हो के,
कर लो आप कलेवा ।। पित्तर देवा…

धूप, दीप, पुष्प,
नै-वैद्य सामग्री सारी ।
तर्पण अर्पण करेंगे पित्तरों,
भूलें न इकबारी ।।
दृष्टान्त दिखा बतलाते रहना,
हो ज्या पार यो खेवा ।। पित्तर देवा…

पिंड दान करेंगे पित्तरों,
हरिद्वार या पिंडरा ।
थारी शुद्ध गति हो ज्यावै,
पूरा काम बने म्हारा ।।
सुख समृद्धि, बेटे-पोते
आदि-आदि वर देवा ।। पित्तर देवा…

ये दिन मिले हैं थारे कारण,
पीढ़ी दर पीढ़ी चाली ।
पंचतत्व ये खड़े साक्षी,
थारा वर ना जा खाली ।।
“रमेश कौशिक” जैसी श्रद्धा वैसी
मलती मेवा ।। पित्तर देवा…

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