Jaisi Karni Waisi Bharni
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Honor your Father and Mother

दोस्तों, हम सब  बहुत पूजा करते है, बहुत सा दान भी देते है, बहुत से मंदिरों, गिरिजाघरों, गुरुद्वारों और मस्जिदों में जाते है और वहां अपना बहुत समय भी देते है। अपनी हैसियत के हिसाब से दान भी देते है। आज कल लोग भंडारे और जागरण में भी अपना समय देते है। मैं इसको गलत भी नहीं कह रहा कि आप ये गलत करते हो। क्या आपने कभी अपने अंदर झाँका है? नहीं, बस हम अपने नाम के लिए बहुत कुछ करते है। मगर भगवान क्यों नहीं मिलता? कैसे मिलेगा ?

जब हमने असली जीते जागते भगवान को छोड़ कर उसको बिसार दिया। हम उसे पाने के लिए चाहे कुछ भी कर ले लेकिन हमें कुछ प्राप्त नहीं होने वाला, क्योंकि भगवान हमारे घर में ही है। मगर कुछ लोगों ने अपने भगवान को वृद्ध आश्रमों में छोड़ दिया है। अब तो आप समझ ही गए होंगे की मैं क्या कहना चाहता हूँ?

 

Jaisi Karni Waisi Bharni

दोस्तों, भगवान हमारे घर में ही है। हमारे माँ-बाप, हम इनको छोड़ कर कभी भी खुश नहीं रह सकते। इनको दुखी करके हमें कुछ प्राप्त नहीं होगा, ना सुख-शांति, ना वैभव, ना सौभग्य। एक तरफ़ तो हम दान करते है और दूसरी तरफ घर में अपने माँ-बाप को छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए तरसाते है। हो सकता है कि वो अपने बच्चों को कई दिनों तक ना देख पाते हो। क्योंकि उनके बच्चे या तो विदेश चले जाते है उन्हें अकेला छोड़ कर या फिर उन्हें ही किसी वृद्ध आश्रम में छोड़ आते है।

क्यों करते है हम ऐसा अपने माँ-बाप के साथ। क्या यही दिन देखने के लिए उन्होंने हमें जन्म दिया था? भविष्य में भी हमारे साथ ऐसा ही होने वाला है, जो आज हम अपने माँ-बाप के साथ कर रहे है, कल हमारे बच्चे भी हमारे साथ वैसा ही करेंगे, शायद इससे भी ज़्यादा।

भगवान नहीं कहते कि- हम अपने माँ-बाप को घर में भूखा छोड़ भण्डारे लगाए या मंदिरों में जाये तभी भगवान हमसे खुश होंगे। दोस्तों, कुछ करना है तो पहले अपने माँ-बाप को खुश रखो, तभी हम खुश रह पाएंगे। सबको मालूम है फिर भी कोई नहीं समझता।

हम अपने बच्चे से कितना प्यार करते है, उसे सारी खुशियां देते है, उसके जन्म से ही अपना सब कुछ उसको समर्पित कर देते है। वो कहीं गीले में ना सो रहा हो, उसका ध्यान रखते है, रात को उठ-उठ कर देखते है। जब वो बड़ा हो जाता है, अपनी हैसियत के हिसाब से उसे बड़े स्कूल में पढ़ाने की सोचते है। उसका साया बनकर उसकी देखभाल करते है। अगर वो बीमार हो जाये तो सारा काम छोड़ कर उसको देखते है। हम दिल से उसकी सारी ज़रूरतें पूरी करते है।

दोस्तों कुछ समझ आ रहा है या नहीं? कहने का मतलब है कि यही सब हमारे माँ-बाप ने भी हमारे लिए किया था। जब बच्चे बड़े हो जाते है, समझदार हो जाते है, तो अपने माँ-बाप को अनदेखा कर अपनी मनमानी भी करते है. जब उनके माँ-बाप बूढ़े हो जाते है तो उन्हें एक कोने में छोड़ देते है, कुछ अपने घर से निकाल देते है, और कुछ खुद उन्हें छोड़ के विदेशों में बस जाते है, अपने माँ-बाप को भूल जाते है।

Jaisi Karni Waisi Bharni

दोस्तों, कहना नहीं चाहता लेकिन कहना बहुत ज़रूरी है। कुछ बच्चे अपने माँ-बाप का सहारा बनना तो दूर की बात उनकी कदर भी नहीं करते। उन्हें बोझ समझते है, उनके साथ गलत व्यवहार करते है। दोस्तों, आपका बच्चा भी आपके साथ ऐसा करे हम सोच कर भी डर जाते है। तो क्यों हम अपने माँ-बाप के साथ ऐसा कर रहे है।

क्या कभी सोचा कि हम सही कर रहे है या नहीं? हम जो अपने माँ बाप के साथ करेंगे वही हमारे बच्चे सीख कर हमारे साथ करेंगे। तो अभी भी वक़्त है अपनी गलती को सुधार लो और भगवान रुपी माता-पिता की सेवा कर अपने आने वाला कल सुखी करे। अगर हमारे माँ-बाप दुखी होंगे तो संसार की कोई भी वस्तु हमें सुख नहीं दे सकती न भगवान हमें कभी माफ़ करेगा और न ही यह समय। क्योंकि जहाँ आज हमारे माँ-बाप है कल हमको भी वहीं होना है। माँ-बाप चाहे कितना भी दुखी क्यों न हो लेकिन वह अपने बच्चों का कभी बुरा नहीं सोचते। मगर जो अपने माँ-बाप को दुःख देता है, वो कभी खुश नहीं रह सकता।

दोस्तों यह लिखते-लिखते मुझे एक वाक्या याद आ गया जिसे मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। यह सच्ची घटना दिल्ली की है। बहुत समय पहले एक पिता ने अपने बेटे को किसी बात पर डांट दिया और थप्पड़ भी मार दिए। माँ-बाप अपने बच्चों की गलती पर मार भी सकते है, उन्हें हक़ है। मगर वो लड़का इतना बुरा मान गया कि उसने अपने पिता जी से बोलना छोड़ दिया। उसके पिता तरसते रहे मगर उस लड़के ने अपने पिता जी से बात नहीं की। बहुत लोगों ने उसे समझाया मगर वो लड़का नहीं माना। समय बीतता गया, लड़के की शादी हो गयी, और उसके एक बेटा भी हो गया। जब वह बच्चा समय के साथ बड़ा हुआ तो पता चला कि वह गूंगा है, बोल नहीं सकता।उसने अपने बाप को तरसाया और जब खुद उसके बेटा हुआ तो वो भी गूंगा।

कहने का मतलब है, जैसा हम करते है वैसा ही हमारे साथ होता है। दोस्तों, सब कुछ करो मगर पहले माँ-बाप को खुश रखो। माँ-बाप को खुश रखोगे तो भगवान अपने आप खुश होंगे।

“वो रुक जाती है कहते-कहते, कभी भूल जाती है कहते-कहते,
और तू देख नहीं पता उसकी नम आँखें, उसको बुरा कहते-कहते,
तेरा कितना ध्यान रखती थी सब सहते-सहते,
तेरी सब चैं चैं मैं मैं सुनती थी हँसते-हँसते”

Written by : B.B. Aggarwal

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